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मंगल दोष क्या है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है

मंगल दोष क्या है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है

वैदिक ज्योतिष में मंगल दोष, जिसे मंगलीक दोष भी कहा जाता है, विवाह से जुड़ी कुंडली मिलान में एक अहम विषय है। यह तब बनता है जब मंगल ग्रह जन्म कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित होता है।

मंगल एक उग्र ग्रह है, जो ऊर्जा, आत्मविश्वास, गुस्से और अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह गलत स्थान पर होता है, तो विवाह, रिश्तों और मानसिक शांति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

मंगल दोष के प्रभाव

  • विवाह में देरी या रुकावट
  • दांपत्य जीवन में तनाव और झगड़े
  • अहंकार और टकराव की प्रवृत्ति
  • शादी के बाद आर्थिक अस्थिरता
  • मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं
  • क्या मंगल दोष स्थायी होता है?
  • हर कुंडली में मंगल दोष एक जैसा असर नहीं करता। इसकी तीव्रता मंगल की स्थिति, अन्य ग्रहों के साथ युति और दोनों पक्षों के मंगलीक होने पर कम हो सकती है।

मंगल दोष के उपाय

  • कुम्भ विवाह – प्रतीकात्मक विवाह जैसे पीपल या केले के पेड़ से
  • मंगलवार को उपवास और सत्संग भोजन
  • हनुमान चालीसा का नियमित पाठ
  • मंगल शांति पूजा
  • तांबे में मूंगा पहनना (ज्योतिषीय सलाह से)
  • मंगलवार को लाल वस्तुओं का दान
  • मंगल दोष से डरें नहीं
  • बहुत से सफल और सुखी विवाहित लोग भी मंगलीक होते हैं। सही कुंडली मिलान, उपाय, और समझदारी से यह दोष संतुलित किया जा सकता है।

निष्कर्ष
मंगल दोष कोई श्राप नहीं, बल्कि ऊर्जा असंतुलन का संकेत है। सही मार्गदर्शन और उपायों से इसे आसानी से शांत किया जा सकता है। Grahfal.com पर आप अपनी कुंडली की गहराई से जांच करवा सकते हैं और उचित उपाय जान सकते हैं।

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