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5 संकेत जो बताते हैं कि आपकी कुंडली को अभी ग्रह शांति की ज़रूरत है

5 संकेत जो बताते हैं कि आपकी कुंडली को अभी ग्रह शांति की ज़रूरत है

क्या आप लगातार जीवन में रुकावटों, तनाव या असफलताओं का सामना कर रहे हैं? क्या बिना किसी कारण के स्वास्थ्य, करियर या रिश्तों में समस्याएं आ रही हैं? अगर हाँ, तो हो सकता है कि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों का संतुलन बिगड़ा हुआ हो और अब समय है ग्रह शांति करवाने का।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक ग्रह हमारे जीवन के किसी न किसी क्षेत्र को प्रभावित करता है। जब कोई ग्रह अशुभ स्थिति में होता है—जैसे कि नीच राशि में, पाप ग्रहों की दृष्टि में, या खराब भाव में—तो उसका असर नकारात्मक रूप में दिखाई देता है।

यहाँ हम बात करेंगे उन 5 संकेतों की, जो ये बताते हैं कि अब आपकी कुंडली को ग्रह शांति की ज़रूरत है।

1. बार-बार कामों में रुकावटें या असफलताएं
अगर आप लगातार यह महसूस करते हैं कि मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिल रही, हर कार्य अधूरा रह जाता है, या आख़िरी समय में कोई बाधा आ जाती है । विशेष रूप से जब दशा/अंतरदशा इन ग्रहों की चल रही हो, तब ये रुकावटें और अधिक बढ़ जाती हैं।

उपाय: शनि मंत्र का जाप करें, शनिवार को तिल का दान करें, और ग्रह शांति पूजा कराएं।

2. नौकरी या व्यापार में लगातार घाटा
नौकरी के लिए आपकी कुंडली में शनि देव की स्तिथि से ही आपकी नौकरी के उतार चढ़ाव को दर्शाते है, और अच्छे व्यापार के लिए बुद्ध की स्तिथि शुभ होना जरूरी है क्योंकि कमजोर बुद्ध आपके व्यापार में उतार चढ़ाव दे सकते है।

प्रमोशन में देरी, ऑफिस में विवाद, या व्यापार में नुकसान—ये बुध, सूर्य और मंगल की अशुभ स्थिति के कारण हो सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में दशम (10वें) भाव का स्वामी कमजोर है, तो करियर में उथल-पुथल हो सकती है।

उपाय: शनि और बुद्ध का जाप करें व दान पुण्य करें

3. शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट
अगर आप बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान, कमजोरी, चिंता या नींद की समस्या महसूस कर रहे हैं, तो यह कुंडली में आपके प्रथम भाव यानी लग्नेश और लग्न भाव के स्वामियो की स्तिथि और चंद्रमा की शुभ या अशुभ स्तिथि से हम शारीरिक और मानसिक स्तिथि को पहचान सकते है

उपाय: लग्न, लग्नेश और चंद्रमा के मंत्र जाप और पूजा आराधना करें

4. वैवाहिक जीवन में तनाव और पारिवारिक कलह
अगर वैवाहिक जीवन में बार-बार झगड़े, गलतफहमियाँ, या अलगाव की स्थिति बन रही है, तो संभव है कि आपकी कुंडली में सप्तम भाव (7th house) से जुड़ा दोष हो। 7वे भाव में कोई भी ग्रह का होना वैवाहिक जीवन में समस्या पैदा कर सकता है।अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए सप्तम और सप्तमेश का शुभ स्तिथि में होना अनिवार्य है। वैसे शास्त्रों में महिला की कुंडली में गुरु की स्तिथि और पुरुषों की कुंडली में शुक्र की स्तिथि से भी वैवाहिक जीवन का आकलन किया जा सकता है

उपाय: सप्तमेश, गुरु और शुक्र के मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते है

5. संतान का होना और संतान से सुख प्राप्त होना
कुंडली में पंचमेश और गुरु की स्तिथि से संतान का होना ज्ञात कर सकते है और संतान से सुख प्राप्त होने के लिए सत्मांश कुंडली और सतमेश की स्तिथि से हम संतान से सुख प्राप्त होगा या नहीं ये ज्ञात कर सकते है

उपाय: पंचमेश और गुरु के मंत्र जाप और दान पूर्ण करने चाहिए

ग्रह शांति क्यों है ज़रूरी?

ग्रह शांति न केवल जीवन की परेशानियों को कम करती है, बल्कि आपको मानसिक शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है। इससे नकारात्मक ग्रह प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में संतुलन आता है।

समाधान क्या है?

  • ग्रह शांति पूजा — हर ग्रह के लिए विशेष पूजा विधि होती है
  • रत्न धारण करना — योग्य ज्योतिषी से सलाह लेकर
  • दान-पुण्य — ग्रह दोष के निवारण हेतु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान
  • मंत्र जप और हवन — ग्रहों की शक्ति को संतुलित करने के लिए

निष्कर्ष

अगर आप उपरोक्त में से किसी भी स्थिति का अनुभव कर रहे हैं, तो अब देर न करें। आपकी कुंडली ग्रहों की चाल का प्रतिबिंब है और सही समय पर ग्रह शांति करवाकर आप अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।

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